،،،،،،،، طيفُ الحبيب،،،،،،
أتي طيفُ الحبيبِ يزورني
فسرني وأوليته ترحيبا
وسألته يامنيةَنفسي وقلبي
ومقلتي مالي أراكَ حزينا
قال هجرتني وتركت مودتي
وكنت لي عاشقا وخليلا
،،،،،،،،،،،،،،،،،،،،،،،،،،،،،،،،،،،،،،،،،،،،،،،
قلتُ وربك ماخنت الهوي
ولم أزل علي العهودِ أمينا
ولكنها الأيام لعبت بيننا
وأعيشُ بعدكَ باكياً وغريبا
بقلمي
احمد ابراهيم الجيار
مصر، بورسعيد
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